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गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ वकà¥à¤¤ होता है जो पति-पतà¥à¤¨à¥€ दोनों के लिठही बहà¥à¤¤ खास होता है। à¤à¤• तरफ आने वाले ननà¥à¤¹à¥‡ मेहमान की खà¥à¤¶à¥€ और माता-पिता बनने का उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹à¥¤ वहीं, दूसरी तरफ आने वाले जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को लेकर मन ढेर सारी उथल-पà¥à¤¥à¤²à¥¤ मन में इस तरह की मिली-जà¥à¤²à¥€ à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं का सैलाब आना सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• है। हालांकि, कई बार इस तरह की उलà¤à¤¨à¥‡à¤‚ दंपतà¥à¤¤à¤¿ के बीच खटास और मनमà¥à¤Ÿà¤¾à¤µ का कारण बन जाती है। à¤à¤¸à¥‡ में वकà¥à¤¤ रहते इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ समà¤à¤¨à¥‡ और धैरà¥à¤¯ से काम लेने की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है। तो इसी खास विषय पर मॉमजंकà¥à¤¶à¤¨ का हमारा यह आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल है। यहां हम पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पति-पतà¥à¤¨à¥€ के रिशà¥à¤¤à¥‡ में होने वाले बदलाव के बारे में जानकारी देगा। साथ ही हम पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में पति पतà¥à¤¨à¥€ का रिशà¥à¤¤à¤¾ कैसा होना चाहिà¤, इसके टिपà¥à¤¸ à¤à¥€ देंगे।
आइठसबसे पहले पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पति-पतà¥à¤¨à¥€ के रिशà¥à¤¤à¥‡ के महतà¥à¤µ के बारे में जानते हैं।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पति-पतà¥à¤¨à¥€ के रिशà¥à¤¤à¥‡ का महतà¥à¤µ
पति-पतà¥à¤¨à¥€ का रिशà¥à¤¤à¤¾ उस वकà¥à¤¤ à¤à¤• नया मोड़ ले लेता है जब पतà¥à¤¨à¥€ पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚ट होती है। इस दौरान पति-पतà¥à¤¨à¥€ के रिशà¥à¤¤à¥‡ में सकारातà¥à¤®à¤• और नकारातà¥à¤®à¤• दोनों तरह के बदलाव आ सकते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में जानते हैं कि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पति-पतà¥à¤¨à¥€ का रिशà¥à¤¤à¤¾ मजबूत होना कितना मायने रखता है।
1. पहले से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ देखà¤à¤¾à¤²
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में पतà¥à¤¨à¥€ को अपना खà¥à¤¯à¤¾à¤² पहले से और जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रखने की जरूरत होती है। साथ ही गरà¥à¤ में पल रहे शिशॠको à¤à¥€ देखà¤à¤¾à¤² की जरूरत होती है। à¤à¤¸à¥‡ में, पतà¥à¤¨à¥€ को यह उमà¥à¤®à¥€à¤¦ रहती है कि पति à¤à¥€ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इमोशनली और फिजिकली सपोरà¥à¤Ÿ करेंगे। अगर à¤à¤¸à¤¾ नहीं होता है तो रिशà¥à¤¤à¥‡ के साथ-साथ पतà¥à¤¨à¥€ और बचà¥à¤šà¥‡ की सेहत पर à¤à¥€ असर पड़ सकता है।
2. सपोरà¥à¤Ÿ जरूरी है
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान अगर पतà¥à¤¨à¥€ को पति का सपोरà¥à¤Ÿ मिले, तो वह अपने शरीर में होने वाले बदलावों के दरà¥à¤¦ को आसानी से सह सकती है। साथ ही, गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में मूड सà¥à¤µà¤¿à¤‚ग से होने वाले à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• बदलावों का उनके मन पर नकारातà¥à¤®à¤• असर नहीं पड़ सकता है।
3. कम होने ना दें पà¥à¤¯à¤¾à¤°
अकà¥à¤¸à¤° देखा गया है कि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के समय पति-पतà¥à¤¨à¥€ के बीच रोमांस की कमी आ जाती है। कई कपलà¥à¤¸ यह नहीं समठपाते कि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान इंटीमेसी कैसे रखी जाà¤à¥¤ इस समय शारीरिक संबंध बनाने को लेकर पति-पति उलà¤à¤¨ महसूस कर सकते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में इस बारे में डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करना अचà¥à¤›à¤¾ विकलà¥à¤ª हो सकता है। वहीं, रिशà¥à¤¤à¥‡ में नयेपन को बनाà¤à¤‚ रखने के लिठकà¥à¤› खास किया जा सकता है। हफà¥à¤¤à¥‡ में कà¤à¥€-कà¤à¥€ रोमांटिक डेट या डिनर पà¥à¤²à¤¾à¤¨ करना अचà¥à¤›à¤¾ विकलà¥à¤ª हो सकता है।
4. आराम देने का वकà¥à¤¤
पतà¥à¤¨à¥€ के पास घर के ढेरों काम होते हैं। वहीं पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में ये काम और जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ बढ़ जाती है और घर संà¤à¤¾à¤²à¤¨à¤¾ मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो जाता है। अगर पति घर के छोटे-छोटे कामों, जैसे कि किचन के काम या साफ-सफाई में उनकी मदद करें, तो पतà¥à¤¨à¥€ को आराम मिलेगा और वह बेहतर तरीके से अपना खà¥à¤¯à¤¾à¤² रख पाà¤à¤‚गी।
5. उलà¤à¤¨à¥‹à¤‚ का दौर
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट महिला के लिठखà¥à¤¦ अपनी पसंद या नापसंद का खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखना मà¥à¤¶à¥à¤•िल होता है। छोटी-छोटी चीजों में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इरà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ हो सकती है। à¤à¤¸à¥‡ में, पति अगर उनकी पसंद-नापसंद का खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखें तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बेहतर महसूस होगा। साथ ही, अगर पतà¥à¤¨à¥€ को किसी चीज का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ करने में या लंच-डिनर में कà¥à¤¯à¤¾ बनाना है यह सोचने में दà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ हो तो पति उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ विकलà¥à¤ª देकर उनकी उलà¤à¤¨ दूर कर सकते हैं। इससे वह खà¥à¤¶ रह पाà¤à¤‚गी और इसका असर बचà¥à¤šà¥‡ की सेहत पर à¤à¥€ पड़ेगा।
6. मानसिक सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना है जरूरी
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में अगर पतà¥à¤¨à¥€ को पति का सपोरà¥à¤Ÿ न मिले, तो à¤à¤—ड़े हो सकते हैं। पतà¥à¤¨à¥€ à¤à¤¸à¤¾ महसूस कर सकती हैं कि पति उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ नजरअंदाज कर रहे हैं। इससे मां की मानसिक और शारीरिक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पर असर पड़ सकता है। सिरà¥à¤« पतà¥à¤¨à¥€ ही नहीं, बलà¥à¤•ि पति खà¥à¤¦ à¤à¥€ कई तरह की चिंताओं से गà¥à¤œà¤°à¤¤à¥‡ हैं। à¤à¤¸à¥‡ में दोनों को à¤à¤• दूसरे से बात करना और अपनी à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं को खà¥à¤²à¤•र वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करने की जरूरत होती है।
7. जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ बांटने का वकà¥à¤¤
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान यह समà¤à¤¨à¤¾ जरूरी है कि बचà¥à¤šà¥‡ की जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ पति और पतà¥à¤¨à¥€ दोनों की होती है। पतà¥à¤¨à¥€ अगर अकेले ही सारी जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ उठाà¤à¤—ी, तो वह खà¥à¤¦ को अकेला महसूस करेंगी। इससे वह सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸ और डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ में à¤à¥€ जा सकती हैं। पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट महिला के मन में à¤à¤¸à¥‡ ही कई तरह की बातें चलती रहती है। इसलिà¤, पति को à¤à¥€ इन बातों का खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखने की जरूरत है और पतà¥à¤¨à¥€ को धैरà¥à¤¯ बंधाने की जरूरत है। पति, पतà¥à¤¨à¥€ को समà¤à¤¾ सकते हैं कि बचà¥à¤šà¥‡ की हर जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ वो उनके साथ बांटेंगे।
8. सà¥à¤ªà¥‡à¤¶à¤² महसूस कराने का वकà¥à¤¤
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के मà¥à¤¶à¥à¤•िल दौर में पतà¥à¤¨à¥€ को वकà¥à¤¤ देना बहà¥à¤¤ जरूरी है। इससे वह खà¥à¤¦ को अकेला महसूस नहीं करेंगी। à¤à¤¸à¥‡ में, पति को काम से थोड़ा वकà¥à¤¤ निकालकर पतà¥à¤¨à¥€ के साथ समय बिताना चाहिà¤à¥¤ à¤à¤¸à¥‡ समय पर पतà¥à¤¨à¥€ की खà¥à¤¶à¥€ का खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखना जरूरी होता है और उसे सà¥à¤ªà¥‡à¤¶à¤² महसूस कराने की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है। सà¥à¤ªà¥‡à¤¶à¤² महसूस कराने के लिठपति चाहे तो पतà¥à¤¨à¥€ को सरपà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤œ गिफà¥à¤Ÿ दे सकते हैं या उनके काम में हाथ बंटा सकते हैं।
वहीं, पतà¥à¤¨à¥€ को à¤à¥€ पति को समà¤à¤¨à¥‡ और पूरा साथ देने की जरूरत है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि पति à¤à¥€ तो इस दौरान कई तरह की चिंताओं का सामना कर रहे होते हैं। हां, वो इस चीज को जाहिर नहीं होने देते हैं, इसलिठसाथ में बैठकर बात करना और थोड़ा वकà¥à¤¤ बिताना अचà¥à¤›à¤¾ विकलà¥à¤ª हो सकता है।
अब जानते हैं कि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पति-पतà¥à¤¨à¥€ के रिशà¥à¤¤à¥‡ में कौन-कौन से बदलाव हो सकते हैं।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पति-पतà¥à¤¨à¥€ के रिशà¥à¤¤à¥‡ में कौन-कौन से बदलाव होते हैं?
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पति-पतà¥à¤¨à¥€ के रिशà¥à¤¤à¥‡ में कई तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ये पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों तरह के हो सकते हैं। तो पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पति-पतà¥à¤¨à¥€ के रिशà¥à¤¤à¥‡ में होने वाले बदलाव कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार हैं:
1. केयर करने से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ बदलाव
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान कई महिलाओं को महसूस होता है कि उनके पति पहले से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ केयरिंग हो गठहैं। दवाई, खान-पान और उनकी पूरी दिनचरà¥à¤¯à¤¾ का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखते हैं। वहीं कà¥à¤› महिलाओं को लगता है कि उनके पति उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ नजरअंदाज कर रहे हैं। पति के सपोरà¥à¤Ÿ से पतà¥à¤¨à¥€ को मानसिक तौर पर सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रहने में मदद मिल सकती है। à¤à¤¸à¥‡ में कà¥à¤› पति में अपनी पतà¥à¤¨à¥€ की देखà¤à¤¾à¤² कर अपनी केयर को जाहिर करते हैं।
वहीं, कà¥à¤› पति आने वाले बचà¥à¤šà¥‡ और जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को लेकर इतने गंà¤à¥€à¤° रहते हैं कि वे काम में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ वकà¥à¤¤ बिताकर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सेविंग करना चाहते हैं। इस वजह से वे पतà¥à¤¨à¥€ को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ वकà¥à¤¤ नहीं दे पाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे पतà¥à¤¨à¥€ की केयर नहीं करते हैं। वे बस जता नहीं पाते, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ को सिकà¥à¤¯à¥‹à¤° करना à¤à¥€ तो केयर ही है ना। इसलिठपतà¥à¤¨à¥€ को इस बात को समà¤à¤¨à¥‡ की जरूरत है।
2. मूड सà¥à¤µà¤¿à¤‚ग की वजह से बदलाव
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी की वजह से महिलाओं में शरीर के साथ-साथ मानसिक बदलाव à¤à¥€ होते हैं। मूड सà¥à¤µà¤¿à¤‚ग की वजह से गà¥à¤¸à¥à¤¸à¤¾ और चिड़चिड़ापन होना आम बात है। à¤à¤²à¥‡ ही सामानà¥à¤¯ बात हो, लेकिन पति-पतà¥à¤¨à¥€ के रिशà¥à¤¤à¥‡ पर इसका असर पड़ सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में, पति को समà¤à¤¦à¤¾à¤°à¥€ दिखाते हà¥à¤ पà¥à¤¯à¤¾à¤° से बात करनी चाहिà¤à¥¤ वहीं, पतà¥à¤¨à¥€ के मन में चल रही परेशानियों की वजह से अगर उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कà¤à¥€ बà¥à¤°à¤¾-à¤à¤²à¤¾ कहा हो तो अपनी गलती को खà¥à¤²à¤•र मानना चाहिà¤à¥¤ साथ ही अपने मन के उलà¤à¤¨à¥‹à¤‚ को लेकर बात करनी चाहिà¤à¥¤
3. फिजिकल रिलेशन में बदलाव
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान फिजिकल रिलेशन बनाने को लेकर पति-पतà¥à¤¨à¥€ दोनों के मन में दà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ हो सकती है। à¤à¤¸à¥‡ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° से इस बारे में बात करें। साथ ही इस दौरान पतà¥à¤¨à¥€ की रजामंदी का à¤à¥€ खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखें। à¤à¤¸à¥‡ में जरूरी है कि दोनों à¤à¤•-दूसरे से बात करें और सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ की गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ को समà¤à¥‡à¤‚।
4. बातचीत में कमी
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान अकà¥à¤¸à¤° à¤à¤¸à¤¾ होता है कि पति-पतà¥à¤¨à¥€ दोनों अपने-अपने काम में वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¤ हो जाते हैं। इस वजह से दोनों à¤à¤• साथ समय नहीं बिता पाते या बातचीत नहीं कर पाते। à¤à¤¸à¥‡ में, अगर पति थोड़ा समय निकालकर पतà¥à¤¨à¥€ के काम में उनकी मदद करे, तो दोनों साथ में वकà¥à¤¤ गà¥à¤œà¤¾à¤° पाà¤à¤‚गे। साथ ही, पतà¥à¤¨à¥€ को à¤à¥€ अचà¥à¤›à¤¾ महसूस होगा। वहीं, पतà¥à¤¨à¥€ को à¤à¥€ वकà¥à¤¤ निकालकर पति से उनके पूरे दिन और काम के बारे में पूछना चाहिà¤à¥¤ इससे उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ अचà¥à¤›à¤¾ लगेगा।
5. टेंशन
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में पति-पतà¥à¤¨à¥€ दोनों को आने वाले बचà¥à¤šà¥‡ को लेकर कà¥à¤› चिंताà¤à¤‚ होती हैं। इस टेंशन के चलते दोनों में मनमà¥à¤Ÿà¤¾à¤µ à¤à¥€ हो सकते हैं। हालांकि, ये तनाव रिशà¥à¤¤à¥‡ में नकारातà¥à¤®à¤• बदलाव लाने के साथ मां की सेहत पर बà¥à¤°à¤¾ असर डाल सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में इस दौरान दोनों को à¤à¤• दूसरे को समà¤à¤¨à¥‡ और à¤à¤• दूसरे से बात करने की जरूरत है, ताकि इसका असर रिशà¥à¤¤à¥‡ और à¤à¤• दूसरे के सेहत पर न पड़े।
6. पà¥à¤¯à¤¾à¤° में कमी
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पतà¥à¤¨à¥€-पतà¥à¤¨à¥€ के रिशà¥à¤¤à¥‡ में à¤à¤• सबसे बड़ा बदलाव आ सकता है, वह है पà¥à¤¯à¤¾à¤° में कमी। à¤à¤¸à¤¾ इसलिठहोता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि दोनों ही अपनी-अपनी जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¤ हो जाते हैं। साथ ही, पति अगर सपोरà¥à¤Ÿ न करे तो दूरियां बढ़ती जाती है। इसके अलावा, कई बार पतà¥à¤¨à¥€ को लगता है कि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की वजह से अब वो पहले जैसी आकरà¥à¤·à¤• नहीं हैं, जिस वजह से पति उन पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ नहीं दे रहे हैं। हालांकि, ये मातà¥à¤° उनके मन का à¤à¤• वहम हो सकता है।
7. इमोशनल सपोरà¥à¤Ÿ की कमी
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पतà¥à¤¨à¥€ को इमोशनल सपोरà¥à¤Ÿ की जरूरत होती है और वह पति से ही इसकी उमà¥à¤®à¥€à¤¦ करती है। अगर पति इमोशनली अपनी पतà¥à¤¨à¥€ को समà¤à¤¤à¤¾ है, तो पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के मà¥à¤¶à¥à¤•िल दिनों को à¤à¥€ महिला आसानी से पार कर जाती है। वहीं अगर पति का साथ न मिले, तो रिशà¥à¤¤à¥‡ में à¤à¤• बड़ा नकारातà¥à¤®à¤• बदलाव देखने को मिल सकता है।
8. विचारों में मतà¤à¥‡à¤¦
बचà¥à¤šà¥‡ के आने की खà¥à¤¶à¥€ तो माता-पिता को होती है, लेकिन कà¤à¥€-कà¤à¥€ विचारों में मतà¤à¥‡à¤¦ होने की वजह से यह खà¥à¤¶à¥€ थोड़ी फीकी पड़ सकती है। बचà¥à¤šà¥‡ के लिठà¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ की पà¥à¤²à¤¾à¤¨à¤¿à¤‚ग करने में दोनों के बीच मतà¤à¥‡à¤¦ हो सकता है। इसके अलावा, पतà¥à¤¨à¥€ की पसंद और नापसंद का खà¥à¤¯à¤¾à¤² न रखना à¤à¥€ मतà¤à¥‡à¤¦ का कारण बन सकता है। इससे, रिशà¥à¤¤à¥‡ में पहले जैसा पà¥à¤¯à¤¾à¤° नहीं रह जाता।
अब जानते हैं कि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान पति-पतà¥à¤¨à¥€ में होने वाले सामानà¥à¤¯ à¤à¤—ड़े कौन-कौन से होते हैं।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान पति-पतà¥à¤¨à¥€ में होने वाले सामानà¥à¤¯ à¤à¤—ड़े
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पति-पतà¥à¤¨à¥€ के रिशà¥à¤¤à¥‡ में कई उतार-चढ़ाव आते हैं। ननà¥à¤¹à¥‡ मेहमान के आने की खà¥à¤¶à¥€ के साथ कई चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¥€ होती हैं। इन चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की वजह से पति-पतà¥à¤¨à¥€ के बीच à¤à¤—ड़े à¤à¥€ हो सकते हैं। जानते हैं कि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पति-पतà¥à¤¨à¥€ के बीच होने वाले सामानà¥à¤¯ à¤à¤—ड़े कौन-कौन से हैं।
1. पैसे की समसà¥à¤¯à¤¾
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में पति-पतà¥à¤¨à¥€ दोनों को ही बचà¥à¤šà¥‡ के à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ की चिंता सताने लगती है। पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में पतà¥à¤¨à¥€ की दवा और खानपान का खरà¥à¤šà¤¾ à¤à¥€ बढ़ जाता है। खरà¥à¤šà¥‹à¤‚ को लेकर पति-पतà¥à¤¨à¥€ में à¤à¤—ड़े हो सकते हैं। साथ ही à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में होने वाले खरà¥à¤šà¥‹à¤‚ को लेकर à¤à¥€ चिंता बढ़ सकती है। à¤à¤¸à¥‡ में, इन सब कारणों से बार-बार à¤à¤—ड़ा करना मां और बचà¥à¤šà¥‡ दोनों की सेहत के लिठनà¥à¤•सानदायक हो सकता है।
2. समय न देना
गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ होने के बाद पतà¥à¤¨à¥€ अपने और बचà¥à¤šà¥‡ के हिसाब से रूटीन सेट करना शà¥à¤°à¥‚ करती है। समय पर उठना और सोना, à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ करना या डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास जाना। वहीं पति à¤à¥€ अपने काम में वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¤ रहते हैं। जब दोनों à¤à¤•-दूसरे को समय नहीं दे पाते, तो वे खà¥à¤¦ को अकेला महसूस करते हैं। यही दूरियां à¤à¤—ड़े की वजह बनती है।
3. केयर न करना
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में मां को सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ केयर की जरूरत होती है। à¤à¤¸à¥‡ में, वह पति से उमà¥à¤®à¥€à¤¦ करती है वे उनकी देखà¤à¤¾à¤² करें। वहीं, जब पति अपने में और अपने काम में ही वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¤ रहते हैं और पतà¥à¤¨à¥€ पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ नहीं दे पाते हैं, तो à¤à¤—ड़ा हो सकता है।
4. बचà¥à¤šà¥‡ का नाम
बचà¥à¤šà¥‡ का नाम रखना, माता-पिता के लिठà¤à¤• बड़ी बात मानी जाती है। à¤à¤¸à¥‡ में, हो सकता है कि दोनों मिलकर किसी à¤à¤• नाम पर अपनी रजामंदी न दे पाà¤à¤‚। बचà¥à¤šà¥‡ के नाम को लेकर जब माता-पिता के विचार नहीं मिलते तो à¤à¤—ड़ा होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है।
5. चिड़चिड़ेपन की वजह से à¤à¤—ड़ा
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पतà¥à¤¨à¥€ के शरीर में कई बदलाव आते हैं। वहीं उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मूड सà¥à¤µà¤¿à¤‚ग जैसी समसà¥à¤¯à¤¾ का à¤à¥€ सामना करना पड़ता है (1)। जब पति, पतà¥à¤¨à¥€ की मानसिक और शारीरिक हालत को नहीं समठपाते हैं तो à¤à¤—ड़ा होना लाजमी है। à¤à¤¸à¥‡ में, हो सकता है कि पतà¥à¤¨à¥€ के मन पर बà¥à¤°à¤¾ असर पड़े।
6. शारीरिक संबंध से जà¥à¥œà¥‡ नोंक-à¤à¥‹à¤‚क
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान फिजिकल रिलेशन बनाना आसान नहीं होता। à¤à¤¸à¥‡ समय पर, पतà¥à¤¨à¥€ की रजामंदी होनी à¤à¥€ जरूरी है। जब पति, पतà¥à¤¨à¥€ की इन à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं को नहीं समठपाते, तो रिशà¥à¤¤à¤¾ खराब हो सकता है। फिर à¤à¤—ड़े à¤à¥€ आम हो जाते हैं। पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में इस मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‡ पर à¤à¤—ड़ा करने से बचें। यह बहà¥à¤¤ ही संवेदनशील विषय है, इसलिठइस बारे में आपस में बात करें और à¤à¤• दूसरे को समà¤à¥‡à¤‚।
7. समà¤à¤¦à¤¾à¤°à¥€ में कमी
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में पति-पतà¥à¤¨à¥€ के बीच à¤à¤—ड़े होने की à¤à¤• वजह समà¤à¤¦à¤¾à¤°à¥€ की कमी à¤à¥€ हो सकती है। पति ये नहीं समठपाते कि कब पतà¥à¤¨à¥€ को कà¥à¤¯à¤¾ चाहिठया कब उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सपोरà¥à¤Ÿ की जरूरत है या। à¤à¤¸à¥‡ समय पर साथी को समà¤à¤¨à¥‡ की जरूरत होती है। वहीं, पतà¥à¤¨à¥€, पति से उमà¥à¤®à¥€à¤¦ करती है कि वो थोड़ा मचà¥à¤¯à¥‹à¤° हो जाà¤à¤‚। अगर à¤à¤¸à¤¾ नहीं होता तो à¤à¤—ड़े शà¥à¤°à¥‚ हो जाते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में, à¤à¤—ड़े से बचने के लिठघर के काम में मदद करके या उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास ले जाकर अपनी केयर और समà¤à¤¦à¤¾à¤°à¥€ दिखा सकते हैं।
8. सिरà¥à¤« खà¥à¤¦ के बारे में सोचना
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान देखा गया है कि पतà¥à¤¨à¥€ और पति सिरà¥à¤« खà¥à¤¦ के बारे में सोचने लगते हैं। पति को à¤à¤¸à¤¾ लगता है कि अब पतà¥à¤¨à¥€ अपनी सेहत और बचà¥à¤šà¥‡ के अलावा किसी और के बारे में बात ही नहीं करती। वहीं पतà¥à¤¨à¥€ को à¤à¥€ à¤à¤¸à¤¾ लग सकता है कि पति अपनी ही दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में रहते हैं। मन में इस तरह का चिंता-à¤à¤¾à¤µ à¤à¥€ à¤à¤—ड़े की à¤à¤• वजह हो सकती है।
अब इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में जानते हैं कि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में पतà¥à¤¨à¥€ को अपने पति से कà¥à¤¯à¤¾ उमà¥à¤®à¥€à¤¦ होती है।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में पतà¥à¤¨à¥€ को कà¥à¤¯à¤¾ उमà¥à¤®à¥€à¤¦ होती है उसके पति से?
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पतà¥à¤¨à¥€ को मेंटल और फिजिकल दोनों तरह के सपोरà¥à¤Ÿ की जरूरत होती है। साथ ही, पतà¥à¤¨à¥€ को पति से कà¥à¤› उमà¥à¤®à¥€à¤¦à¥‡à¤‚ होती हैं। आइठजानते हैं कि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पतà¥à¤¨à¥€ की किन उमà¥à¤®à¥€à¤¦à¥‹à¤‚ पर खरा उतरना जरूरी है।
1. साथ पाने की उमà¥à¤®à¥€à¤¦
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पतà¥à¤¨à¥€ के लिठपति का सपोरà¥à¤Ÿ होना जरूरी है। पतà¥à¤¨à¥€ चाहती है कि पति उनके काम में हाथ बटाà¤à¤‚ और उनका हर कदम पर साथ दे। à¤à¤¸à¥‡ में पति, पतà¥à¤¨à¥€ के साथ कà¥à¤› वकà¥à¤¤ बिताकर उनको सपोरà¥à¤Ÿ कर सकते हैं। साथ बैठकर बातें करें, खाना खाà¤à¤‚ या फिलà¥à¤® देखें। साथ ही, उनसे उनके दिल की बात जानने और उनके दरà¥à¤¦ को बांटने की कोशिश करना जरूरी है। इससे पतà¥à¤¨à¥€ को à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ होगा कि उनका पारà¥à¤Ÿà¤¨à¤° उनकी केयर करता है। पति का सपोरà¥à¤Ÿ मिलने से पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚ट महिला फिजिकली और मेंटली दोनों तरह से रिलैकà¥à¤¸ महसूस करती हैं।
2. देखà¤à¤¾à¤² की उमà¥à¤®à¥€à¤¦
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के समय गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ को अधिक देखà¤à¤¾à¤² की जरूरत होती है। अगर पति, अपनी पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚ट पतà¥à¤¨à¥€ की देखà¤à¤¾à¤² करे, तो यह उसके लिठसबसे सà¥à¤–द à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ होता है। पति को पतà¥à¤¨à¥€ के लिठसमय निकालकर उसकी देखà¤à¤¾à¤² करनी चाहिà¤, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि बचà¥à¤šà¥‡ की जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ सिरà¥à¤« पतà¥à¤¨à¥€ की ही नहीं पति की à¤à¥€ होती है। पतà¥à¤¨à¥€ के खान-पान से लेकर समय पर दवाई लेने तक की जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ पति को उठानी चाहिà¤à¥¤
3. फिजिकल और मेंटल सपोरà¥à¤Ÿ की उमà¥à¤®à¥€à¤¦
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान महिलाओं में कई तरह के फिजिकल और मेंटल बदलाव होते हैं (2)। à¤à¤¸à¥‡ में पतà¥à¤¨à¥€ को फिजिकली और मेंटली, दोनों तरह के सपोरà¥à¤Ÿ की जरूरत होती है। पति अगर चाहे तो पतà¥à¤¨à¥€ को ये सपोरà¥à¤Ÿ देकर उनकी आधी तकलीफें दूर कर सकते हैं। साथ ही, उनके आस-पास अपनी मौजूदगी बनाठरखें, ताकि अगर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ किसी चीज की जरूरत हो तो आप उनकी मदद कर सकें। ऑफिस के काम से वकà¥à¤¤ निकालकर पति को पतà¥à¤¨à¥€ को फोन कर लेना चाहिà¤, इससे पतà¥à¤¨à¥€ को अचà¥à¤›à¤¾ और सà¥à¤ªà¥‡à¤¶à¤² महसूस होगा।
3. घर के कामों में मदद की उमà¥à¤®à¥€à¤¦
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट महिला को डॉकà¥à¤Ÿà¤° आराम करने की सलाह देते हैं। वहीं, पतà¥à¤¨à¥€ के पास घर के ढेरों काम होते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में पतà¥à¤¨à¥€ को उमà¥à¤®à¥€à¤¦ होती है कि पति उनके काम में हाथ बटाà¤à¤‚। अगर हाथ न à¤à¥€ बटाà¤à¤‚ तो कम से कम उनसे पूछे कि कहीं उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ किसी चीज की या उनकी मदद की जरूरत तो नहीं है। पति चाहें, तो पतà¥à¤¨à¥€ के बिना कहे ही घर के छोटे-छोटे कामों, जैसे कि किचन के काम या साफ-सफाई में उनकी मदद कर सकते हैं। इससे पतà¥à¤¨à¥€ का काम हलà¥à¤•ा हो जाà¤à¤—ा और वह जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय तक आराम कर सकेंगी।
4. पतà¥à¤¨à¥€ की पसंद-नापसंद का खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखने की उमà¥à¤®à¥€à¤¦
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट महिला के लिठखà¥à¤¦ अपनी पसंद या नापसंद का खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखना मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो सकता है। छोटी-छोटी चीजों का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ करते वकà¥à¤¤ वो चिड़चिड़ी हो सकती हैं। à¤à¤¸à¥‡ में, पति अगर उनकी पसंद-नापसंद का खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखें तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बेहतर महसूस होगा। पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पतà¥à¤¨à¥€ को मानसिक रूप से शांति देने के लिठपति का सपोरà¥à¤Ÿ बेहद जरूरी है।
5. समà¤à¤¨à¥‡ की उमà¥à¤®à¥€à¤¦
अकà¥à¤¸à¤° देखा गया है कि पतà¥à¤¨à¥€ मूड सà¥à¤µà¤¿à¤‚ग की वजह से यह समठबैठती है कि पति उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ नजरअंदाज कर रहे हैं। पतà¥à¤¨à¥€ के मन में अजीब-अजीब से खà¥à¤¯à¤¾à¤² à¤à¥€ आने लगते हैं। नतीजा, पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पति-पतà¥à¤¨à¥€ में à¤à¤—ड़े होने लगते हैं। इन à¤à¤—ड़ों से बचने का सबसे बेहतर तरीका यह है कि पति, पतà¥à¤¨à¥€ को हर तरह से सपोरà¥à¤Ÿ करें। वहीं, मूड सà¥à¤µà¤¿à¤‚ग की वजह से अगर वो चिड़चिड करें तो पति उलà¥à¤Ÿà¤¾ उनसे बहस या à¤à¤—ड़ा न करें, बलà¥à¤•ि उनकी परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को समà¤à¥‡à¤‚। पतà¥à¤¨à¥€ के मूड सà¥à¤µà¤¿à¤‚ग को दिल से न लगाà¤à¤‚ और उनसे पà¥à¤¯à¤¾à¤° से बात करें।
6. पति होने की जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ समà¤à¤¨à¥‡ की उमà¥à¤®à¥€à¤¦
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान जरूरी है कि पति अपने ऑफिस के काम से थोड़ा समय निकालकर पतà¥à¤¨à¥€ को दे। बचà¥à¤šà¥‡ की जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ पति-पतà¥à¤¨à¥€ मिलकर उठाà¤à¤‚गे, तो दोनों हलà¥à¤•ा महसूस करेंगे। पतà¥à¤¨à¥€ को घà¥à¤®à¤¾à¤¨à¥‡ ले जाने या साथ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास जाने का पà¥à¤²à¤¾à¤¨ बनाà¤à¤‚। पति का सपोरà¥à¤Ÿ पाकर पतà¥à¤¨à¥€ खà¥à¤¶à¥€ महसूस करती है।
7. बचà¥à¤šà¥‡ के à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ की साथ में पà¥à¤²à¤¾à¤¨à¤¿à¤‚ग की उमà¥à¤®à¥€à¤¦
बचà¥à¤šà¥‡ की जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ पति और पतà¥à¤¨à¥€ दोनों की होती है, इसलिठकोई à¤à¥€ पà¥à¤²à¤¾à¤¨à¤¿à¤‚ग साथ में करें। फिर चाहे वह बचà¥à¤šà¥‡ का नाम रखना हो या उसका कमरा सजाना हो। इसके अलावा, पति को पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के बारे में पूरी जानकारी रखनी चाहिà¤, जिससे जरूरत पड़ने पर वे, पतà¥à¤¨à¥€ की मदद कर सकें।
इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल के अंतिम à¤à¤¾à¤— में जानते हैं कि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में पति की अपनी पतà¥à¤¨à¥€ के लिठकà¥à¤¯à¤¾ जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ होती है।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में पति की कà¥à¤¯à¤¾ जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ होती है अपनी पतà¥à¤¨à¥€ के लिà¤?
अकà¥à¤¸à¤° à¤à¤¸à¤¾ देखा गया है कि पति को लगता है कि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान उनकी कोई जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ नहीं है। वे समà¤à¤¤à¥‡ हैं कि बचà¥à¤šà¥‡ के अचà¥à¤›à¥‡ à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ के लिठबस पैसा कमाना ही उनकी पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤•ता है। इसलिठवे निशà¥à¤šà¤¿à¤‚त होकर अपने काम में वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¤ रहते हैं। जबकि à¤à¤¸à¤¾ सोचना गलत है। पतà¥à¤¨à¥€ और होने वाले बचà¥à¤šà¥‡ को लेकर पति की बहà¥à¤¤ सी जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ होती हैं, जो कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार हैं:
1. पतà¥à¤¨à¥€ को अकेला महसूस न होने दें
पति-पतà¥à¤¨à¥€ को बचà¥à¤šà¥‡ के आने की खà¥à¤¶à¥€ साथ मिलकर बांटनी चाहिà¤à¥¤ पति यह समà¤à¥‡à¤‚ कि जब à¤à¥€ पतà¥à¤¨à¥€ को उनकी जरूरत हो, तो वे उनके साथ उनके पास मौजूद रहें। पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के 9 महीने तक मां को सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ केयर की जरूरत होती है। à¤à¤¸à¥‡ में, जरूरी है कि पति अपनी पतà¥à¤¨à¥€ की हर बात सà¥à¤¨à¥‡à¤‚ और समà¤à¥‡à¤‚। पतà¥à¤¨à¥€ के शरीर और मूड में होने वाले बदलावों को सà¥à¤µà¥€à¤•ारने में उनकी मदद करें।
2. पतà¥à¤¨à¥€ के लिठअपना रूटीन बदलें
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पतà¥à¤¨à¥€ को अपनी दिनचरà¥à¤¯à¤¾ बदलनी पड़ती है। वहीं पति की à¤à¥€ जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ है कि वह पतà¥à¤¨à¥€ के लिठअपना रूटीन बदलें। पति, पतà¥à¤¨à¥€ के साथ टहलने जा सकते हैं, कोई गेम खेल सकते हैं। पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में योग वॠवà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करने में उनकी मदद करें। किसी रोमांटिक डेट पर ले जाà¤à¤‚ या सà¥à¤ªà¤¾ कराने ले जाà¤à¤‚। ये छोटी-छोटी चीजें पतà¥à¤¨à¥€ की खà¥à¤¶à¥€ की वजह बने सकती है।
3. पतà¥à¤¨à¥€ से बातचीत करें
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान महिला का मन चिड़चिड़ा हो सकता है या उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ घबराहट महसूस हो सकती है। à¤à¤¸à¥‡ में, वे कई बार पति के साथ की उमà¥à¤®à¥€à¤¦ करती हैं। अगर पति, पतà¥à¤¨à¥€ की बातें सà¥à¤¨à¤•र उनकी परेशानी समà¤à¤¤à¤¾ है, तो वे रिलैकà¥à¤¸ महसूस कर सकती हैं। à¤à¤¸à¥‡ में यह जरूरी है कि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के समय पतà¥à¤¨à¥€ से बातचीत करके उनकी मनोदशा जानने की कोशिश की जाà¤à¥¤ इससे पति-पतà¥à¤¨à¥€ का रिशà¥à¤¤à¤¾ बेहतर हो सकता है।
4. साथ में घूमें और à¤à¤•-दूसरे को खà¥à¤¶ रखें
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में अकà¥à¤¸à¤° महिलाà¤à¤‚ घर में आराम करते-करते à¤à¥€ परेशान हो जाती हैं। à¤à¤¸à¥‡ में, पति को उनके साथ बाहर घूमने का पà¥à¤²à¤¾à¤¨ बनाना चाहिà¤à¥¤ पति की केयर मिलने से पतà¥à¤¨à¥€ खà¥à¤¶ रहेगी और इसका असर बचà¥à¤šà¥‡ के विकास पर à¤à¥€ पड़ेगा। पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के इस नाजà¥à¤• समय में पति-पतà¥à¤¨à¥€ दोनों को à¤à¤•-दूसरे के साथ की जरूरत होती है।
5. पतà¥à¤¨à¥€ को खास महसूस करवाà¤à¤‚
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पति का साथ न मिलने के कारण पतà¥à¤¨à¥€ खà¥à¤¦ को अकेला महसूस करने लगती हैं। इससे मां की सेहत के साथ बचà¥à¤šà¥‡ पर à¤à¥€ असर पड़ता है। पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पति-पतà¥à¤¨à¥€ के रिशà¥à¤¤à¥‡ में आने वाले बदलावों से बचना जरूरी है। इसके लिà¤, पतà¥à¤¨à¥€ को खास महसूस करवाà¤à¤‚। पतà¥à¤¨à¥€ की छोटी-छोटी खà¥à¤µà¤¾à¤¹à¤¿à¤¶à¥‹à¤‚ को पूरा करके उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सà¥à¤ªà¥‡à¤¶à¤² महसूस करवाया जा सकता है।
6. à¤à¤—ड़ा करने से बचें
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के 9 महीने पतà¥à¤¨à¥€ के लिठखास होने के साथ मà¥à¤¶à¥à¤•िल à¤à¥€ होते हैं। à¤à¤¸à¥‡ समय पर, उनके लिठतनाव लेना या चिंता करना अचà¥à¤›à¥€ बात नहीं है। पति की यह जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ होती है कि वह उनसे किसी à¤à¥€ बात à¤à¤—ड़ा न करें। साथ ही, उनकी हालत को समà¤à¤¤à¥‡ हà¥à¤ बड़ी बात को à¤à¥€ हलà¥à¤•ा करने की कोशिश करें।
7. पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के बारे में जानकारी
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट पतà¥à¤¨à¥€ के लिठपति का सपोरà¥à¤Ÿ सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मायने रखता है। इस दौरान पतà¥à¤¨à¥€ लेबर पेन के डर से गà¥à¤œà¤°à¤¤à¥€ है। साथ ही, शरीर में होने वाले बदलाव उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ चिड़चिड़ा बना देते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में जरूरी है कि पति पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के बारे में पूरी जानकारी रखें, ताकि पति, पतà¥à¤¨à¥€ के दरà¥à¤¦ को समठसके। साथ ही जरूरत पड़ने पर पतà¥à¤¨à¥€ की मदद कर सके और पतà¥à¤¨à¥€ को समà¤à¤¾ सके कि वो उनके साथ हैं। पति के इन विषयों पर दिलचसà¥à¤ªà¥€ लेने से पतà¥à¤¨à¥€ को अचà¥à¤›à¤¾ लगेगा और à¤à¤—ड़ों की गà¥à¤‚जाइश à¤à¥€ कम होगी।
8. रोमांस बनाठरखें
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान हो सकता है कि पतà¥à¤¨à¥€ के मूड सà¥à¤µà¤¿à¤‚ग के चलते कà¤à¥€-कà¤à¥€ पति उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ समठही न पाà¤à¥¤ जब पति का रोमांस का मूड हो, तो पतà¥à¤¨à¥€ साफ इनकार कर दे। वहीं, इनकार के बाद पतà¥à¤¨à¥€ को à¤à¤¸à¤¾ लग सकता है कि उनके इनकार से पति नाराज होकर उनसे दूर हो सकते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में, पति को पतà¥à¤¨à¥€ से गà¥à¤¸à¥à¤¸à¤¾ होने के बजाय उनके फैसले और इचà¥à¤›à¤¾ का समà¥à¤®à¤¾à¤¨ करना चाहिà¤à¥¤ साथ ही पà¥à¤¯à¤¾à¤° और रोमांस को बरकरार रखने के लिठघर में ही डिनर डेट या कà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ टाइम बिताना चाहिà¤à¥¤ वहीं, कà¤à¥€ अगर पतà¥à¤¨à¥€ को किसी चीज की जरूरत हो तो पति उनके इशारे को समà¤à¤•र उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उनकी जरूरत की चीज लाकर दें। à¤à¤¸à¥€ छोटी-छोटी चीजों से ही तो पà¥à¤¯à¤¾à¤° बरकरार रहता है।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान पति-पतà¥à¤¨à¥€ का रिशà¥à¤¤à¤¾ à¤à¤• नाजà¥à¤• मोड़ से गà¥à¤œà¤°à¤¤à¤¾ है।
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